8वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इसकी सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। अब इस समय का एक बड़ा हिस्सा बीत चुका है और आने वाले महीनों में आयोग को अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने रखनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से जुड़े बदलावों पर फैसला करेगी।
पेंशनर्स ने रखी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
भारत पेंशनर्स समाज ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्च को देखते हुए पेंशनर्स को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसी वजह से न्यूनतम पेंशन को 45,000 रुपये करने की मांग की गई है। संगठन के अनुसार इससे रिटायर कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सहारा मिल सकता है।
हर तीन महीने में बढ़े महंगाई भत्ता
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में साल में दो बार बदलाव किया जाता है। भारत पेंशनर्स समाज चाहता है कि महंगाई भत्ते में हर तीन महीने पर संशोधन किया जाए। संगठन का तर्क है कि महंगाई तेजी से बढ़ती है, इसलिए छह महीने के अंतराल में बदलाव होने से पेंशनर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
25 प्रतिशत डीए पर मर्जर की मांग
पेंशनर्स संगठन ने यह भी मांग की है कि जब महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए तो उसे बेसिक पे में शामिल करने की व्यवस्था हो। संगठन का मानना है कि इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय महंगाई के अनुरूप बेहतर तरीके से समायोजित हो सकेगी। हालांकि, यह फिलहाल एक मांग है और इस पर सरकार का अंतिम फैसला बाकी है।
3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग
फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी बड़ी मांग सामने आई है। भारत पेंशनर्स समाज ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। संगठन के प्रस्ताव के अनुसार इससे मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि वास्तविक वेतन कितना बढ़ेगा, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिश और सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
परिवार की परिभाषा में बदलाव की मांग
संगठन ने फैमिली यूनिट का दायरा बढ़ाने की मांग भी रखी है। वर्तमान व्यवस्था में परिवार की यूनिट से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग करते हुए माता-पिता को भी इसमें शामिल करने का सुझाव दिया गया है। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिहाज से बेहतर लाभ मिल सकता है।
सरकार के फैसले के बाद तस्वीर होगी साफ
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा। फिलहाल 45,000 रुपये न्यूनतम पेंशन, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, डीए में ज्यादा बार संशोधन और 25 प्रतिशत डीए के मर्जर जैसी मांगें चर्चा में हैं। इन मांगों को स्वीकार करना या उनमें बदलाव करना पूरी तरह सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और संगठनों की ओर से रखी गई मांगों पर आधारित है। इनमें से किसी भी मांग को सरकार द्वारा मंजूर किया हुआ निर्णय न माना जाए। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश और केंद्र सरकार के फैसले के बाद ही वेतन, पेंशन और महंगाई भत्ते में वास्तविक बदलाव की पुष्टि होगी।








